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भारत की राजनीतिक में जुमलोंं की बड़ी घौंस! सियाशत के इस गलियारे में कैसे मील के पत्थर बन गए चुनावी नारे

भारत की राजनीति में चुनावी नारों का बड़ा प्रभाव देखा गया है. तमाम राजनीतिक दल अपने-अपने समय में नारों का क सहारा ले कर राजनीति में बड़ा मुकाम हाशिल किया है. वो चाहे 1965-66 के दौर के जवाहल लाल नेहरू हों या 2024 के दौर के नरेन्द्र मोदी सभी नें राजनीतिक जुमलों का सहारा लिया है. 

भारत में दो राज्य (महाराष्ट्र और झारखंड) में विधानसभा और उत्तर प्रदेश समेंत तमाम राज्यों में विधासभा उप चुनाव 20 नवंबर को होना है, इसी बीच उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का दिया हुआ चुनावी नारा "बटेंगे ते कटेंगे" बड़ा ही चर्चा का विषय बना हुआ है. योगी के इस चुनावी नारा  "बटेंगे ते कटेंगे" अब दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है. तमाम विपक्षी दल इसके काट में लगे हुए हैं. बीजेपी का नया नारा "एक हैं तो सेफ हैं" को राजनीतिक मंच पर एक नए रणनीति के तर्ज पर उतारा गया है. 26 अगस्त को दुर्गादास राठौर की प्रतिमा के अनीवरण के अलरस पर येगी आदित्यनाथ ने बांग्लादेश की घटना का उदाहरण देत हुए कहा "बटेंगे ते कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे" 

योगी के दिए गए इस नारे "बटेंगे ते कटेंगे, एक रहेंगे तो सेफ रहेंगे"  की काट को लेकर समाज वादी पार्टी ने "पीडिए जोडेगी औप सेफ रहेगी" वहीं बहुजन समाज पार्टी ने "जुडेंगे तो आगे पढेंगे, सुरक्षित रहेंगे" का नारा दिया है. अब योगी के दिए इस बयान को लेकर काफी उठापटक देखी जा रही है. माहाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजीत पवार ने इस नारे को नजरअंदाज कर रहे हैं. अजीत पवार ने कहा कि  "बटेंगे ते कटेंगे" यहां पर नही चलेगा, वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ने भी "बटेंगे ते कटेंगे" के मानने से इनकार कर रहे हैं. 

भारतीय इतिहास में अभी तक का सबसे बेहतरीन नारा:

1.वर्ष 1965-66 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान तत्कालीन सीएम लाल बहदुर शास्त्री ने "जय जवान-जय किसान" का नारा दिया था. यह नारा कांग्रेस के लिए मील का पत्थ


र बन कर सामने आया और कांग्रेस चुनाव जीतने में कामयाब रही है.

2. वर्ष 1971 में इंदिरा गांधी के इमेज के मेकओवर करने के लिए और चुनाव में बोहतर प्रदर्शन करने के लिए "गरीबी हटाओ" का नारा दिया था. इसी बीच इंदिरा गांधी ने कहा था "ये कहते हैं इंदिरा हटाओ और हम कहते है गरीबी हटाओ"

3. 1989 -90 में "राजा नहीं फकीर है, देश का तकदीर है" नारा उत्तर भारत में पीवी की ब्रैंडिग का हथियार बना था.

4. 1991-1993 में "राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे" 1993 में मुलायम-काशीराम ने "मिले मुलायम-कांशीरामृ, हवा में उड़ गए जय श्री राम" का नारा दिया था.

5. वर्ष 1996-99 के दौरान "सब को दोखा बारी-बरी, अब की बार अटल बिहारी"

6. 2014 में "हर-हर मोदी, घर-घर मोदी", "मोदी लाओ देख बचाओ", "अब की बार मोदी सरकार"

7. 2019 में "मोदी है तो मुमकिन", "बहुत हुई महंगाई की मार अबकी बार मोदी सरकार"









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