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Hindi Day 14th Sep 2025 : मोहब्बत के इजहार से लेकर संसद की पगडंडियों तक हिंदी की गूंज! जानें देश में क्यूं हिंदी को राजभाषा का दिया जाता है दर्जा?

भारत एक ऐसा देश भिन्न-भिन्न प्रकार के लोग रहते हैं. सबकी अपनी अलग-अलग भाषा भी है. आजादी के बाद भारत देश में राज्यों का बटवारा ही भाषा के आधार पर किया गया था. बिहार में भोजपुरी/हिंदी, उत्तर प्रदेश में हिंदी, दिल्ली में हिंदी, एमपी में हिंदी, गुजरात में गुजराती, पंजाब में पजाबी, हरियाणा में हरियाणवी, महाराष्ट्रा में मराठी, तमिलनाडु में तेलुगू, उड़ीसा में उडिया भाषा बोली जाती है. देश के 28 राज्य और 8 कैंद्र शासित प्रदेशों में अपनी खुद की अलग-अलग भाषाएं बोली जा रही हैं. इन सब में हिंदी ही एक ऐसी भाषा है जो भारत ही नही दुनिया भर में बोली जाती आ रही है. 

भारत में अधिकतर केंद्रिय शिक्षण परीक्षाओं में हिंदी और अंग्रेजी को बड़े ही आसानी से प्रयोग किया जाता है. देश में बड़े-बड़े कवियों के सम्मेलल हिंदी में ही होते हैं. हिंदी कविताएं, शायरी, फिल्में आदि सभी लोगों को काफी आकर्शित करती हैं. वो चाहे मोहब्बत का इजहार करना हो या फिर संसद में देश को संबोधित करना हो लोगों को मोहित करनें के लिए हिंदी ही एक बड़ा और सरल माध्य है. देश में भले ही लोग अंग्रेजी को अपना रहे हों लेकिन आज भी हिंदी लोगों की सबसे प्रिय भाषा रही है. रामधारी सिंह दिनकर, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, हरिवंशराय बच्चन, महादेवी वर्मा, जयशंकर प्रशाद, अटल बिहारी बाजपेयी, कबीर दाश, तुलशी दाश, मुंसी प्रेमचंद्र, मीराबाई और आज के दौर के कुमार विश्वास की रचनाएं आज भी लोगों के दिलों में मानों घर कर गई हों. 

हिंदी दिवस क्यों: हिन्दी दिवस प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है. 14 सितम्बर 1949 को ही संविधान सभा ने यह निर्णय लिया था कि हिन्दी केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा होगी. चूंकि भारत मे अधिकतर क्षेत्रों में हिन्दी भाषा बोली जाती थी, इसलिए हिन्दी को राजभाषा बनाने का निर्णय लिया और इसी निर्णय के महत्व को प्रतिपादित करने तथा हिन्दी को प्रत्येक क्षेत्र में प्रसारित करने के लिये वर्ष 1953 से पूरे भारत में 14 सितम्बर को प्रतिवर्ष हिन्दी-दिवस के रूप में मनाया जाता है. स्वतन्त्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, हजारीप्रसाद द्विवेदी, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंह ने अथक प्रयास किये.

इतिहास: वर्ष 1918 में गांधी जी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राजभाषा बनाने को कहा था. इसे गांधी जी ने जनमानस की भाषा भी कहा था. वर्ष 1949 में स्वतंत्र भारत की राजभाषा के प्रश्न पर 14 सितम्बर 1949 को काफी विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया जो भारतीय संविधान के भाग 17 के अध्याय की अनुच्छेद 343(1) में इस प्रकार वर्णित है. संघ की राजभाषा हिन्दी और लिपि देवनागरी होगी. संघ के राजकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप अन्तरराष्ट्रीय रूप होगा. इस निर्णय के बाद मूल हिन्दोस्तानी बोली उर्दू के शकल से प्रतिस्थापित हो जाते हैं. 

यह निर्णय 14 सितम्बर को लिया गया, इसी दिन हिन्दी के मूर्धन्य साहित्यकार व्यौहार राजेन्द्र सिंह का 50वाँ जन्मदिन था, इस कारण हिन्दी दिवस के लिए इस दिन को श्रेष्ठ माना गया था. हालांकि जब राष्ट्रभाषा के रूप में इसे चुना गया और लागू किया गया तो अ-हिन्दी भाषी राज्य के लोग इसका विरोध करने लगे और अंग्रेजी को भी राजभाषा का दर्जा देना पड़ा. इस कारण हिन्दी में भी अंग्रेजी भाषा का प्रभाव पड़ने लगा. राजस्थानी भाषा के कईं शब्द कोस है. Source: Wikipedia






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