सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

एक तस्वीर करोडो शब्दों के बराबर होती है! समय को ठहरा देने वाला एक अनोखा पल, विश्व फोटोग्राफी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


फोटोग्राफी एक एसी कला है जो आप के मत्वपूर्ण पलों को हमेसा के लिए कैद कर के रख देता है. फोटोग्राफी ही एक मात्र एसी तकनीक है जिसमें समय को रोकने की ताकत भी होती है. एक दौर था जब तस्वीरें खीचना या खिचवाना किसी सपने से कम नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे समय बदला तकनीकि के इस दौर में हर एक इंसान खुद को फोटोग्राफर ही मानने लगा है. 

19 अगस्त को दुनिया भर में विश्व फोटोग्राफी दिवश के रूप में मनाया जाता है. यह केवल एक दिवश नहीं बल्कि लाखों करोड़ो दिलों  को छू लेने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. यह एक ऐसा पर्व है जो मात्र तस्वीरों पर ही समर्पित है. तस्वीरें उस गूंगी गुड़िया की तरह होती हैं जो बिना कुछ बोले सब कुछ कहने कि मांदा रखती हैं. तस्वीरें केवल आंखों को सुकून नहीं बल्कि हमारे दिलों और दिमाग में घर कर जाती हैं. 

विश्व के पटल पर फोटोग्राफी की कहानी काफी कमाल की है. फोटोग्राफी की कहनी 19वीं सदी से शुरू होती है. 1839 में फ्रांस के दो वैज्ञानिकों जोसेफ निसफोर नीप्स औल लुई डागुऐरे ने डागोरोटाइप प्रक्रिया का आविश्कार किया जिसे दुनिया की पहली फोटो ग्राफी तकनीकि मानी जाती है. 19 अगस्त 1839 को फ्रांसीसी सरकार ने इस प्रक्रिया का पेटेंट खरीदकर इसे दुनिया के लिए मुक्त घोषित कर दिया. यही वह दिन है जिसे विश्व फोटोग्राफी दिवश के रूप में मनाया जाता है.

भारत में फोटोग्राफी का इतिहास:

  • भारत में फोटोग्राफी का इतिहास 19वीं सदी की शुरुआत में अंग्रेजों द्वारा शुरू किया गया था. 1839 में डग्युरियोटाइप तकनीक के आविष्कार के बाद, यह भारत में तेजी से लोकप्रिय हुई. 1840 तक, कलकत्ता में थैकर, स्पिंक एंड कंपनी ने अपने दैनिक समाचार पत्र "फ्रेंड ऑफ इंडिया" में डागेरियोटाइप कैमरे के आयात और बिक्री का विज्ञापन प्रकाशित करना शुरू कर दिया था. 19वीं सदी के मध्य तक, फोटोग्राफी भारत में एक लोकप्रिय माध्यम बन गई थी, जिसका उपयोग विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था, जिसमें दस्तावेजीकरण, कलात्मक अभिव्यक्ति और राजनीतिक परिवर्तन शामिल थे. 

भारत में फोटोग्राफी के इतिहास के कुछ प्रमुख पहलू:

  • 19वीं सदी के मध्य में, फोटोग्राफी भारत में एक प्रशासनिक उपकरण के रूप में आई, लेकिन जल्द ही इसका उपयोग कलात्मक और व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भी किया जाने लगा. 
  • 19वीं सदी के अंत और 20वीं सदी की शुरुआत में, भारत में स्टूडियो फोटोग्राफी का उदय हुआ. इस समय के प्रसिद्ध स्टूडियो में से एक लाला दीन दयाल एंड संस था. 

भारतीय फोटोग्राफरों का उदय:

  • 20वीं सदी में, भारतीय फोटोग्राफर जैसे ज्योति भट्ट, मित्तर बेदी, और सुरेश पंजाबी ने फोटोग्राफी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया. 

डिजिटल फोटोग्राफी:

  • 20वीं सदी के अंत में डिजिटल फोटोग्राफी के आगमन के साथ, फोटोग्राफी में एक और क्रांति आई. 

आज:

  • आज, फोटोग्राफी भारत में एक लोकप्रिय माध्यम बनी हुई है, जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों के लिए किया जाता है, जिसमें कला, पत्रकारिता, और सामाजिक-सांस्कृतिक दस्तावेजीकरण शामिल हैं. 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Indian Team t20 WC Squid: विश्वकप में शुभमन गिल और जितेश शर्मा को नहीं मिला मौंका, रिंकू सिंह और इशान किशन की टीम में वापसी

7 फरवरी से 2026 से भारत और श्रीलंका की मेजबानी में विश्वकप का आगाज होने जा रहा है. भारत नें विश्वकप को ध्यान में रखते हुए भारत और न्युजीलैंड की आगामी सिरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है. भारतीय मुख्य चयन कर्ता अजीत अगर्कर और कप्तान सूर्यकुमार यादव की उपस्थिती में भारतीय टीम के Squid का ऐलान किया गया. उम्मीदों से इतर इस विश्व कप की कताम में गिल को नही देखा जाएगा. बता दें कि विश्वकप 2026 के लिए टीम इंडिया में शुभमन गिल और जितेश सर्मा की जगह इशान किशन बतौर विकेट कीपर खेलने वाले है, वहीं चयन कर्ताओं ने रिंकू सिंह की तरफ ध्यान आकर्शित किया है.  इशान किशन की कप्तानी में झारखंड की टीम ने विजय हजारे ट्राॅफी का खिताब जीत कर चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी तरफ खीचा था. झारखंड की तरफ से इशान किशन ने शतक लगा कर मुकाबले को एकतरफा कर दिया था. टीम इंडिया के चयन के बाद एएनआई से बात करते हुए इशान ने कहा कि "बहुत ही अच्छा लग रहा है". प्रेसकाॅन्फेंस में सूर्या ने गिल के सवाल कर पर जवाब देते हुए कहा "मिडिल ऑर्डर में एक विकेट कीपर चाहिए था, गिल के फार्म का कोई भी मसला नही था".  कयास यह...

71वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार 2025: मलयालम फिल्म अभिनेता मोहन लाल ने जीता "दादासाहेब फाल्के" तो किंग खान और विक्रांत मैसी के नाम रहा सर्वश्रेष्ट अभिनेता का खिताब

71वें फिल्म पुरस्कार की घोषणा कर दी गई हैं, यहा समारोह का आयोजन दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया. 23 सितंबर 2025 को आयोजित इस कार्य क्रम में देश की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने कलाकारों को अवाॅर्ड देकर सम्मानित किया. 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार की घोषणा 01 अगस्त को की गई थी. कोरोना महामारी की वजह से इसको दो वर्ष की देरी से दिया गया. 71वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी ने मलयालम फिल्म अभिनेता मोहनलाल को दादासाहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया. फिल्म "जवान" के लिए साहरूख खान औप फील्म "12वीं फेल" के लिए विक्रांत मैसी को सर्वश्रेष्ट अभिनेता का खिताब दिया वहीं फिल्म "मिसेज़ चटर्जी वर्सस नॉर्वे" फिल्म के लिए रानी मुखर्जी को सर्वश्रेष्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया गया. इससे पहले हिंदी फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.  वेस्ट फीचर फिल्म "12 फेल" के लिए विधु विनोद चोपड़ा को सम्मानित किया गया. द केरला स्टोरी के लिए सुदीप्तो सेनसर्वश्रेष्ठ को बेस्...

Sudheer Babu और Sonakshi Sinha की आगामी फिल्म "Jatadhara" का ट्रेलर हुआ जारी, Mahesh Babu ने सोशल मीडिया पर किया साझा

दक्षिण फिल्मों के अभिनेता महेश बाबू (Mahesh Babu) ने सुधीर बाबू (Sudheer Babu) की 'Jatadhara' का ट्रेलर अपने सोशल मीडिया पर साझा किया है. इस ट्रेलर में सोनाक्षी सिन्हा और सुधीर बाबू की कमाल की जोड़ी देखी जा रही है. ट्रेलर में सोनाक्षी सिन्हा को एक भयानक पितासिनी की भूम्का में दिखाया गया है. ट्रेलर के मुताबिक यह फिल्म पूर्ण रूप से हाॅरर नजर आ रही है.  इस फिल्म में सुधीर बाबू को मुख्य भूमिका में दिखाया गया है. ट्रेलर में यह भी पाया गया जहां पर सोनाक्षी और सुधीर बाबू एक दूसरे के साथ फाईट करते नजर आ रहे हैं. Venkat Kalyan और Abhishek Jaiswal के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म एक्शन और रोमांचक से लबरेज नरज आ रहा है. फिल्म  'Jatadhara' एक ऐसी कहानी है, जहां काला जादू सिर्फ एक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक खतरनाक हथियार है, जो इंसानी नियंत्रण से परे शक्तियों को मुक्त करता है. इस मुद्दे पर तमाम फिल्में बन भी चुका हैं. अक्षय कुमार की फिल्म "भूल भुलैया", "लक्ष्मी" जैसी फिल्में इसी मुद्दे पर आधारित हैं.  फिल्म में किसकी भूमिका: इस फिल्म में  सुधीर बाबू, सोनाक्षी सिन्हा और...