बिहार विधानसभा चुनाव 2025: अगला मुख्यमंत्री कौन! फिर से नितीश कुमार या फिर तेजस्वी यादव? NDA और I.N.D.I.A दोनों ने नहीं खोले हैं ताश के पत्ते
बिहार में विधानसभा 2025 चुनाव का बिगुल बज चुका है. चुनाव आयोग के द्वारा तारीखों के ऐलान के बाद बड़ी ही गहमा-गहमी का माहौल देखा जा रहा है. पहले चरण के लिए दोनों ही दलों ने अपने प्रत्याशियों के नामांकन कर दिए हैं. NDA की तरफ से JDU और BJP 101-101 और LJP (R) 29 सीट, वहीं हम और रालोमों 6-6 सीट पर चुनाव लड़ने वाली हैं. बिहार में कुल 243 सीट पर चुनाव होने वाला है. लेकिन LJP (R) की प्रत्यासी सीमा सिंह का नामांकन रद्द होने के बाद अब NDA 242 पर ही चुनाव लड़ रही है. दूसरी तरफ I.N.D.I.A घटक की तरफ से कुछ शुभ संकेत नजर नहीं आ रहे हैं. I.N.D.I.A घटक के सभी पार्टी अपनें ही चौंड़ में नजर आ रहे हैं. शीट बटवारे को लेकर अभी तक कुछ पता नहीं चल रहा है. पहले चरण के नामांकन हो चुका है, लेकिन अभी कुछ तय नजर नहीं आ रहा है. यही वजह है कि I.N.D.I.A की तरफ से कई सीटें ऐसी हैं जहां पर I.N.D.I.A घटक के प्रत्याशी आमने-सामने नजर आ रहे हैं. कहते हैं न जब घर का गार्जियन सही होता है तो परिवार नही बिखरता है, वहीं जब परिवार का गार्जियन सही नहीं होता तो परिवार विखरता हुआ ही नजर आता है.
बिहार चुनाव सेलिब्रिटी का बड़ा ही जमावड़ा देखा जा जा रहा है. NDA की तरफ से पवन सिंह, मैथिली ठाकुर हैं तो I.N.D.I.A की तरफ से खेसाली लाल यादव और जितेश पांड़े जन सुराज के साथ ताल ठोक रहे हैं. बिहार में 06 नवंबर को पहले चरण की वोटिंग होने वाली है. इसको ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी 24 अक्टूबर से चुनाव प्रचार करने वाले हैं. I.N.D.I.A की करफ से राहुल गांधी नदारद नजर आ रहे हैं. वहीं गठबंधन के सभी दल विखरे हुए नजर आ रहे हैं. बिहार में AIMIM के ओवैसी को अंडर इस्टीमेट नहीं किया जा रकता है. बिहार में 11 सीटों पर लगभग 40% वोट मुस्लिम समुदाय का है. बिहार में कुल 17.7 फीसदी मुस्लिम समुदाय है, जो लगभग 47 सीटों पर निर्णीयक साबित हो लकते हैं. बिहार में दलित वोटरों की संख्या 20 फीसदी है, जहां पर 40 सीटें ऐसी हैं जो दलित वर्ग के लिए आरक्षित भी हैं. AIMIM, ASP और स्वामी प्रशाद मौर्या की AJP इन्हीं वोटों पर निसाना साधने की कोशिश होगी.
बिहार में थर्ड फ्रंट NDA और I.N.D.I.A के लिए काफी मुश्किल खड़ा कर सकता है? जन सुराज दूसरी तरफ ताल ठोक रही हैं. दोनों ही तरफ से मुख्यमंत्री के लिए कोई भी दल मुख्यमंत्री का चेहरा रिवील नही किया जा रहा रहा है. RJD तेजस्वी को मुख्यमंत्री मान रही है, लेकिन इंडिया घटक की तरफ से मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर केई बात नहीं किया जा रहा है. एनडिए की तरफ से भी नितीश कुमार को मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं माना जा रहा है. राजनीतिक पंड़ितों का मानना है कि अगर नितीश की पार्टी कम सीट लाती है तो उनको सीएम नही बनाया जाएगा. इसका सबसे बड़ा उदाहरण महाराष्ट्रा है जहां पर चेहरा तो एकनाथ शिंदे थे लेकिन सीएम फड़नवीश को बना दिया गया है. अगर बिहार में बीजेपी अच्छा करती है तो वो खुद के चेहरे को सीएम बनाने की कोशिश करेंगे. बिहार में बीजेपी का कोई बाड़ा चेहरा न होने के कारण मजबूरन बैशाखी का सहारा लेना पड़ता है.

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