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दलित विरोधी मानसिकता का पुरजोर समर्थक है भारत या राज्य सरकार! लखनऊ पेशाब कांड पर आखिर खामोश क्यों है योगी की बुलड़ोजर वाली नीति


देश में आए दिन दलितों के खिलाफ अमानवीय घटनाएं देखी जा रही हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश के लखनऊ से ऐसी ही एक घटना सामने आई है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी थाना क्षेत्र के पुरानी बाजार स्थित शीतला मंदिर में आरएसएस कार्यकर्ता द्वारा दलित बुजुर्ग रामपाल पासी को पेशाब चाटने के लिए मजबूर किया गया जो कि एक सर्मनाक अपराध की श्रेणी में आता है, यह जातिवाद और सामंतवाद की सदियों पुरानी दलित विरोधी मानसिकता का नंगा प्रदर्शन है. बीमार बुजुर्ग को गलती से पेराब हो जाने से हिंदू संगठन के युवक ने बुजुर्ग को पेशाब चटबाया और जाति सूचक शब्दों के जरिए गाली भी दिया, आरोपी बुजुर्ग ने कहा “तूने पेशाब किया है” और पानी मंगवाकर उसी से धुलवाया. इसके साथ ही जातिसूचक गालियाँ देकर उन्हें अपमानित किया गया. यह न केवल मानवता पर कलंक है, बल्कि संविधान की आत्मा पर प्रहार भी है. 

उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि मध्य प्रदेश की भी एक घटना सामने आई है. यहां पर भी एक दलित युवक को मारा गया और उसे पेशाब भी पिलाया गाया. BJP शासित मध्य प्रदेश के भिंड जिले की यह घटना सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि सामंती और जातिवादी मानसिकता का नंगा प्रदर्शन है। एक दलित ड्राइवर को नौकरी छोड़ने की "सजा" के तौर पर अपहरण, मारपीट और पेशाब पिलाने जैसी अमानवीय यातना दी गई. BJP शासित इन राज्यों में ऐसी बहुत सी घटनाएं सामने आती ही जा रही हैं, और सरकारें इसपर कोई भी कदन नहीं उठा रही हैं. उत्तर प्रदेश में योगी सरकार वैसे तो बहुत ही कड़े शासन की बात करती हैं! आज ही नहीं जब भी दलितों के विरोध कुछ भी हुआ है योगी सरकार और BJP खामोश हो जाती है और मानों की उनके मुंह में दही जम जाती है. अगर योगी सरकार दलित, ओबीसी, आदिवाशी और मुस्लिमों पर होने वाले अत्याचारों पर नकेल नहीं कस करती तो आखिर किस बात के लिए सीएम बने बैठे हैं. यही वो सरकार है जो आज समाज को धर्म के नाम पर तोड़ कर रख दी है. 

आखिर भारत कैसे बनेगा विश्वगुरू! जहां पर जातिवाद, धर्मवाद कूट-कूट कर भरा हो. ब्राह्मण और ठकुरों के विचारधारा पर चलने वाली यह सरकार जब वोट मांगना होता है तो बराबर दलित, ओबीसी, आदिवाशी और मुस्लिमों को याद करती है. एक ऐसा वर्ग जो हमेसा ही दलित, ओबीसी, आदिवाशी और मुस्लिमों को गालियां देता रहा है. आज भी वे लोग इंसान को इंसान नही मानते हैं और उनपर गलत व्यवहार करते आ रहे हैं, लेकिन जब दलित, ओबीसी, आदिवाशी और मुस्लिम समुदाय में से कोई भी बीजेपी या फिर ब्राम्हणों और ठाकुरों के खिलाफ बोलता है तो अचानक सरकार और मीड़िया जग जाती है और उनके खिलाफ बोलने वाले को उठा लेती है और कार्यवाई भी कर दी जाती है. सरकार का यह दोगला और दोहरा चरित्र नहीं कहैंगे तो आखिर क्या कहेंगे! 

जब एक मनुवादी सोच वाला व्यक्ति मुख्य न्यायाधीस के उपर जूता फेकता है तो वहां पर सरकारें खामोश हो जाती हैं और मनुवादी मीडिया ऐसे इंसान को फुटेज देने में लगा हुआ था, वहीं ग्वालियर का अनिल मिश्रा ड़ाॅ भीम राव अंबेडकर के खिलाफ अनाप-सनाप बक रहा है. एमपी सरकार और भारत सरकार उसके खिलाफ कुछ भी नहीं कर रही है और मीडिया उसे भी फुटेज देने में लगी है. हरियाणा में दलित IPS अधिकारी की आत्म हत्या की घटना भी सरकार की मनुवादी सोच का एक प्रमाण है. हिंदू धर्म की कुरीतियों और बीजेपी के खिलाफ बोलने वाले के घर पर योगी का बुलड़ोजगर चल जाता है तो क्या दलितों पर अत्याचार करने वालों वाले के खिलाफ कोई भी एक्शन क्यों नही लिया जाता है?












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